आरव हँस पड़ा। उसे लगा... शायद ये होटल लोगों को डराकर मशहूर होना चाहता है। वो तीस...
आरव हँस पड़ा। उसे लगा... शायद ये होटल लोगों को डराकर मशहूर होना चाहता है। वो तीसरी मंज़िल पर पहुँचा। पूरा कॉरिडोर अजीब तरह से शांत था। ऐसा लग रहा था... जैसे इस मंज़िल पर कोई रहता ही नहीं। कमरा तीन सौ सात का दरवाज़ा खुलते ही... अंदर सब कुछ बिल्कुल नया था। साफ़ बिस्तर... लकड़ी की खुशबू... गर्म रोशनी... लेकिन... एक चीज़ गायब थी। पूरे कमरे में... एक भी आईना नहीं था। आरव ने सोचा... "अजीब होटल है..." उसने अपना कैमरा निकाला... और व्लॉग रिकॉर्ड करना शुरू किया। लेकिन जैसे ही उसने कैमरे की स्क्रीन देखी... उसके पीछे... कोई खड़ा था। ________________________________________ आरव तुरंत पीछे मुड़ा... लेकिन कमरा... पूरी तरह खाली था। ________________________________________
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