बाहर पूरा कॉरिडोर बदल चुका था। दीवारों का रंग उतर चुका था। लकड़ी सड़ चुकी थी। ला...
बाहर पूरा कॉरिडोर बदल चुका था। दीवारों का रंग उतर चुका था। लकड़ी सड़ चुकी थी। लाइटें टूट चुकी थीं। जैसे... आरव किसी और समय में पहुँच गया हो। उसने नीचे भागने की कोशिश की। लेकिन...<sigh> हर सीढ़ी... उसे वापस... कमरा तीन सौ सात के सामने ले आती। ________________________________________ तभी... कमरे के अंदर से... उसने अपनी ही आवाज़ सुनी...<sigh> "आरव... अंदर आ जाओ..."
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