घड़ी में... दो बजकर बयालीस मिनट हो चुके थे। आरव ने खुद को समझाया... "ये सब थकान...
घड़ी में... दो बजकर बयालीस मिनट हो चुके थे। आरव ने खुद को समझाया... "ये सब थकान है..." तभी... अलमारी का दरवाज़ा... धीरे-धीरे खुलने लगा। अंदर... पुरानी तस्वीरों का एक डिब्बा रखा था। हर तस्वीर में... अलग-अलग लोग थे। लेकिन... उन सबकी आखिरी फोटो... इसी कमरे में ली गई थी। सबकी आँखों के पीछे... एक काली परछाई खड़ी थी। ________________________________________ आखिरी तस्वीर देखकर... आरव के हाथ काँपने लगे। क्योंकि... उस तस्वीर में... वो खुद था।
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