हिन्दी M2 – Deep ⏱ 42s 💾 3.6 MB

घड़ी में... दो बजकर बयालीस मिनट हो चुके थे। आरव ने खुद को समझाया... "ये सब थकान...

घड़ी में... दो बजकर बयालीस मिनट हो चुके थे। आरव ने खुद को समझाया... "ये सब थकान है..." तभी... अलमारी का दरवाज़ा... धीरे-धीरे खुलने लगा। अंदर... पुरानी तस्वीरों का एक डिब्बा रखा था। हर तस्वीर में... अलग-अलग लोग थे। लेकिन... उन सबकी आखिरी फोटो... इसी कमरे में ली गई थी। सबकी आँखों के पीछे... एक काली परछाई खड़ी थी। ________________________________________ आखिरी तस्वीर देखकर... आरव के हाथ काँपने लगे। क्योंकि... उस तस्वीर में... वो खुद था।

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▶ 0 изслушвания ↓ 0 изтегляния 2026-08-03

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HI M2 21s

कबीर धीरे-धीरे पीछे मुड़ा। पीछे... कोई नहीं था। फिर उसने... मिरर देखा। अब... पीछे बैठा आदमी... धीरे-धीरे... मुस्कुरा रहा था। उसका चेहरा... पूरी तरह जला हुआ था। ________________________________________ अचानक... उस आदमी ने... मिरर के अंदर से... अपना हाथ बाहर निकाला... _________________________________

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HI M2 27s

कबीर ने ड्राइवर से पूछा... "ये कौन-सी जगह है?" ड्राइवर मुस्कुराया... "जहाँ लोग आते तो हैं... लेकिन... वापस नहीं जाते।" कबीर घबरा गया। उसने तुरंत दरवाज़ा खोलने की कोशिश की। दरवाज़ा... अंदर से लॉक था। उसी समय... रियर-व्यू मिरर में... उसे पीछे एक और यात्री दिखाई दिया। __________________________________

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HI M2 24s

कबीर ने सोचा... शायद कोई मज़ाक कर रहा है। वह टैक्सी में बैठ गया। दरवाज़ा बंद हुआ। टैक्सी चल पड़ी। दो मिनट बाद... कबीर ने मोबाइल निकाला। नेटवर्क... गायब था। GPS... बंद था। उसने बाहर देखा। सड़कें... मुंबई की नहीं थीं। ________________________________________ सामने लगे बोर्ड पर लिखा था... "स्वागत है...

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HI M2 46s

अगर आधी रात को... कोई टैक्सी खुद आपके सामने आकर रुक जाए... और ड्राइवर आपका नाम लेकर कहे... "बैठो... मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रहा था..." तो क्या आप बैठेंगे? मुंबई... रात के एक बजकर सत्रह मिनट... पत्रकार कबीर मेहरा एक न्यूज़ शूट खत्म करके घर लौट रहा था। बारिश लगातार हो रही थी। सड़क पूरी तरह सुनसान थी।

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HI M2 35s

अचानक... मेट्रो रुक गई। दरवाज़े खुले। इस बार... बाहर... दिल्ली मेट्रो स्टेशन था। सुबह हो चुकी थी। रोहन भागकर बाहर आया। स्टेशन बिल्कुल सामान्य था। उसने राहत की साँस ली। तभी... उसकी जेब में रखा... वही पुराना टिकट... अपने आप जलने लगा। राख बनने से पहले... उस पर सिर्फ एक लाइन बची... "अगला स्टेशन... होटल

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HI M2 24s

रोहन ने... फिर भी... पीछे देखा। ड्राइवर केबिन का दरवाज़ा खुला हुआ था। अंदर... कोई ड्राइवर नहीं था। सिर्फ... एक पुरानी डायरी रखी थी। उसके पहले पन्ने पर लिखा था... प्रोजेक्ट काल... ________________________________________ नीचे... एक लाइन लिखी थी... **"कमरा तीन सौ सात से भागने वाले... यहीं आते हैं..."*

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