बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अल्हम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन, वस्सलातु वस्सलामु अला...
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम अल्हम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन, वस्सलातु वस्सलामु अला सय्यिदिल अंबिया वल मुरसलीन। आज हम बयान करेंगे अल्लाह के अज़ीम नबी, हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का मुबारक वाक़िआ। यह कोई अफ़साना नहीं, बल्कि क़ुरआन-ए-करीम में बयान किया गया एक सच्चा वाक़िआ है, जो हर दौर के इंसानों के लिए हिदायत, सब्र, ईमान और अल्लाह पर मुकम्मल भरोसे का पैग़ाम लेकर आया। उस ज़माने में मिस्र की सरज़मीन पर फ़िरऔन नाम का एक निहायत ज़ालिम और सरकश बादशाह हुकूमत करता था। उसने अपने घमंड और तकब्बुर में ख़ुद को लोगों का सबसे बड़ा मालिक समझ लिया था। वह लोगों से कहता था कि उसके सिवा कोई माबूद नहीं। बनी इस्राईल पर उसका ज़ुल्म दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था। वह उन्हें सख़्त मेहनत करवाता, उन पर तरह-तरह की तकलीफ़ें डालता और उनके नवजात बेटों को क़त्ल करवा देता, जबकि बेटियों को ज़िंदा छोड़ देता। इसी दौर में अल्लाह तआला ने अपने अज़ीम नबी, हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की विलादत का फ़ैसला फ़रमाया। जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम पैदा हुए, तो उनकी वालिदा के दिल में अपने मासूम बेटे की जान का बहुत ख़ौफ़ था। मगर उसी वक़्त अल्लाह तआला
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