कुछ ही देर बाद उन दोनों लड़कियों में से एक हया के साथ चलती हुई हज़रत मूसा अलैहिस...
कुछ ही देर बाद उन दोनों लड़कियों में से एक हया के साथ चलती हुई हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम के पास आई और कहने लगी, "मेरे वालिद आपको बुला रहे हैं, ताकि आपने जो हमारी मदद की है उसका बदला आपको दे सकें।" हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम उनके साथ उनके घर पहुँचे। वहाँ उनकी मुलाक़ात एक नेक और बुज़ुर्ग शख़्स से हुई। उन्होंने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम से पूरा हाल पूछा। जब हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने मिस्र से लेकर मदीयन तक का सारा वाक़िआ बयान किया, तो उस बुज़ुर्ग ने फ़रमाया, "अब डरने की कोई बात नहीं। तुम ज़ालिमों की क़ौम से निकल आए हो।" उनकी एक बेटी ने अपने वालिद से अर्ज़ किया, "अब्बा जान! इन्हें अपने यहाँ काम पर रख लीजिए। यक़ीनन सबसे बेहतर आदमी वही है जो ताक़तवर भी हो और अमानतदार भी।" उस बुज़ुर्ग ने हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम से फ़रमाया कि अगर वह कुछ साल उनके यहाँ ख़िदमत करें, तो वह अपनी एक बेटी का निकाह उनसे कर देंगे। हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने यह पेशकश क़ुबूल कर ली। कई साल तक उन्होंने पूरी ईमानदारी और अमानत के साथ अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाईं। जब यह मुद्दत पूरी हुई, तो हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम अपनी अहलिया के साथ वापस
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