वही शख़्स एक बार फिर किसी दूसरे आदमी से झगड़ रहा था। तभी एक आदमी दौड़ता हुआ आया...
वही शख़्स एक बार फिर किसी दूसरे आदमी से झगड़ रहा था। तभी एक आदमी दौड़ता हुआ आया और उसने कहा, "ऐ मूसा! सरदार तुम्हें क़त्ल करने की सलाह कर रहे हैं। फ़ौरन यहाँ से निकल जाइए।" यह सुनते ही हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने अल्लाह पर भरोसा किया और मिस्र छोड़कर मदीयन की तरफ़ रवाना हो गए। सफ़र बहुत लंबा था। न कोई सवारी, न खाने का सामान और न कोई साथी। लेकिन जिस मुसाफ़िर का सहारा अल्लाह हो, उसे किसी और सहारे की ज़रूरत नहीं होती। कई दिनों के सफ़र के बाद वह मदीयन पहुँचे। वहाँ एक कुएँ के पास बहुत से लोग अपने जानवरों को पानी पिला रहे थे। उसी जगह दो शर्मीली और हया वाली लड़कियाँ अपने रेवड़ को रोके खड़ी थीं। हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने उनसे पूछा, "तुम पानी क्यों नहीं पिलातीं?" उन्होंने जवाब दिया, "जब तक ये लोग लौट नहीं जाते, हम इंतज़ार करती हैं। हमारे वालिद बहुत बूढ़े हैं।" यह सुनकर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने बिना किसी लालच के उनके जानवरों को पानी पिला दिया। फिर एक पेड़ के साये में बैठकर अल्लाह से दुआ की, "ऐ मेरे रब! तू जो भी भलाई मेरी तरफ़ उतारे, मैं उसका मोहताज हूँ।"
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