"क्या आपने कभी सोचा है... कि मैं हर वर्ष अपने भव्य मंदिर से बाहर रथ पर सवार होकर...
"क्या आपने कभी सोचा है... कि मैं हर वर्ष अपने भव्य मंदिर से बाहर रथ पर सवार होकर क्यों निकलता हूँ? लोग कहते हैं कि मैं अपनी मौसी के घर, गुंडिचा मंदिर जाता हूँ... और यह सत्य भी है। लेकिन इस यात्रा का उद्देश्य केवल मौसी के घर जाना नहीं है। मैं स्वयं अपने भक्तों के पास आता हूँ... ताकि हर व्यक्ति, चाहे वह अमीर हो या गरीब, किसी भी जाति या समाज का हो... बिना किसी भेदभाव के मेरे दर्शन कर सके। यही है रथ यात्रा का सबसे बड़ा संदेश... भगवान कभी अपने भक्तों से दूर नहीं होते। जब प्रेम से बुलाया जाता है, तो भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच चले आते हैं। जय जगन्नाथ!"
Copy and paste this HTML into your website.
<iframe src="https://vach.cc/embed/163e65039f9512ee7c39169ff0da9a8c" width="100%" height="80" frameborder="0" allow="autoplay" loading="lazy" title="VoiceForge Audio"></iframe>