ने उन पर वह्य के ज़रिए दिल में इत्मीनान डाला कि बच्चे को दूध पिलाओ, और जब ख़तरा...
ने उन पर वह्य के ज़रिए दिल में इत्मीनान डाला कि बच्चे को दूध पिलाओ, और जब ख़तरा महसूस हो, तो उसे एक संदूक में रखकर दरिया-ए-नील में बहा दो। हरगिज़ ग़म न करना और न डरना, क्योंकि अल्लाह उसे तुम्हारी तरफ़ लौटा देगा और उसे अपना रसूल बनाएगा। हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की वालिदा ने अल्लाह के हुक्म पर मुकम्मल भरोसा किया। उन्होंने अपने जिगर के टुकड़े को एक मज़बूत संदूक में रखा और दरिया-ए-नील के हवाले कर दिया। दरिया की लहरें उस संदूक को बहाती हुई फ़िरऔन के महल तक ले गईं। जब संदूक खोला गया, तो उसमें एक नूरानी चेहरा वाला मासूम बच्चा था। अल्लाह तआला ने फ़िरऔन की बीवी, हज़रत आसिया अलैहस्सलाम के दिल में उस बच्चे की मोहब्बत डाल दी। उन्होंने फ़िरऔन से कहा, "इसे क़त्ल मत करो। उम्मीद है कि यह बच्चा हमारे लिए आँखों की ठंडक बनेगा या हम इसे अपना बेटा बना लेंगे।" यहीं से अल्लाह की वह तदबीर शुरू हुई, जिसे दुनिया की कोई ताक़त रोक नहीं सकती थी। जिस बच्चे को फ़िरऔन मार देना चाहता था, वही बच्चा उसके अपने महल में उसकी निगरानी में पलने लगा। अल्लाह की मर्ज़ी के आगे सबसे बड़ी सल्तनत भी बेबस हो गई।
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