डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा था... "आज रात... तीन बजे... दरवाज़े पर कोई दस्तक देगा। वो तुम्हारा नाम लेकर बुलाएगा। अगर तुमने दरवाज़ा खोल दिया... तो तुम बाहर नहीं जाओगे तुम यहीं रह जाओगे।" उसी समय... घड़ी ने तीन बजा दिए। ठक...ठक...ठक... ________________________________________ बाहर से आवाज़ आई...
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डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा था... "आज रात... तीन बजे... दरवाज़े पर कोई दस्तक देगा। वो तुम्हारा नाम लेकर बुलाएगा। अगर तुमने दरवाज़ा खोल दिया... तो तुम बाहर नहीं जाओगे तुम यहीं रह जाओगे।" उसी समय... घड़ी ने तीन बजा दिए। ठक... ठक... ठक... ________________________________________ बाहर से आवाज़ आई..
डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा था... "आज रात... तीन बजे... दरवाज़े पर कोई दस्तक देगा। वो तुम्हारा नाम लेकर बुलाएगा। अगर तुमने दरवाज़ा खोल दिया... तो तुम बाहर नहीं जाओगे तुम यहीं रह जाओगे।" उसी समय... घड़ी ने तीन बजा दिए। ठक... ठक... ठक... ________________________________________ बाहर से आवाज़ आई..
डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा था... "आज रात... तीन बजे... दरवाज़े पर कोई दस्तक देगा। वो तुम्हारा नाम लेकर बुलाएगा। अगर तुमने दरवाज़ा खोल दिया... तो तुम बाहर नहीं जाओगे तुम यहीं रह जाओगे।" उसी समय... घड़ी ने तीन बजा दिए। ठक... ठक... ठक... ________________________________________ बाहर से आवाज़ आई..
डायरी के आखिरी पन्ने पर लिखा था... "आज रात... तीन बजे... दरवाज़े पर कोई दस्तक देगा। वो तुम्हारा नाम लेकर बुलाएगा। अगर तुमने दरवाज़ा खोल दिया... तो... तुम बाहर नहीं जाओगे... तुम... यहीं रह जाओगे।" उसी समय... घड़ी ने... तीन बजा दिए। ठक... ठक... ठक... ________________________________________ बाहर से आ
वो धीरे-धीरे कमरे में वापस गया। बिस्तर पर... एक पुरानी डायरी रखी थी। पहला पन्ना खुला। उसमें लिखा था... "अगर तुम ये पढ़ रहे हो... तो तुम... मेरे बाद वाले मेहमान हो।" डायरी के नीचे... हस्ताक्षर थे... आरव शर्मा। ________________________________________ लेकिन... ये उसकी अ
वो धीरे-धीरे कमरे में वापस गया। बिस्तर पर... एक पुरानी डायरी रखी थी। पहला पन्ना खुला। उसमें लिखा था... "अगर तुम ये पढ़ रहे हो... तो तुम... मेरे बाद वाले मेहमान हो।" डायरी के नीचे... हस्ताक्षर थे... आरव शर्मा। ________________________________________ लेकिन... ये उसकी अपनी लिखावट थी... ______________
बाहर पूरा कॉरिडोर बदल चुका था। दीवारों का रंग उतर चुका था। लकड़ी सड़ चुकी थी। लाइटें टूट चुकी थीं। जैसे... आरव किसी और समय में पहुँच गया हो। उसने नीचे भागने की कोशिश की। लेकिन...<sigh> हर सीढ़ी... उसे वापस... कमरा तीन सौ सात के सामने ले आती। ________________________________________ तभी... कमरे
बाहर पूरा कॉरिडोर बदल चुका था। दीवारों का रंग उतर चुका था। लकड़ी सड़ चुकी थी। लाइटें टूट चुकी थीं। जैसे... आरव किसी और समय में पहुँच गया हो। उसने नीचे भागने की कोशिश की। लेकिन...<sigh> हर सीढ़ी... उसे वापस... कमरा तीन सौ सात के सामने ले आती। ________________________________________ तभी... कमरे के
बाहर पूरा कॉरिडोर बदल चुका था। दीवारों का रंग उतर चुका था। लकड़ी सड़ चुकी थी। लाइटें टूट चुकी थीं। जैसे... आरव किसी और समय में पहुँच गया हो। उसने नीचे भागने की कोशिश की। लेकिन...<sigh> हर सीढ़ी... उसे वापस... कमरा तीन सौ सात के सामने ले आती।<sigh> ________________________________________ तभी...<sig
तस्वीर के पीछे लिखा था... "सत्रह नवंबर उन्नीस सौ अठहत्तर"<sigh> लेकिन... आरव का जन्म तो... उन्नीस सौ अट्ठानवे में हुआ था। ये कैसे हो सकता था? तभी... कमरे की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं। पूरा कमरा... अंधेरे में डूब गया। फिर... एक आवाज़ आई... "हम... पचास साल से... तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे" __________
तस्वीर के पीछे लिखा था... "सत्रह नवंबर उन्नीस सौ अठहत्तर"<breath> लेकिन... आरव का जन्म तो... उन्नीस सौ अट्ठानवे में हुआ था। ये कैसे हो सकता था? तभी... कमरे की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं। पूरा कमरा... अंधेरे में डूब गया। फिर... एक आवाज़ आई... "हम... पचास साल से... तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे" ________
तस्वीर के पीछे लिखा था... "सत्रह नवंबर उन्नीस सौ अठहत्तर" लेकिन... आरव का जन्म तो... उन्नीस सौ अट्ठानवे में हुआ था। ये कैसे हो सकता था? तभी... कमरे की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं। पूरा कमरा... अंधेरे में डूब गया। फिर... एक आवाज़ आई... "हम... पचास साल से... तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे" ________________
तस्वीर के पीछे लिखा था... "सत्रह नवंबर उन्नीस सौ अठहत्तर" लेकिन... आरव का जन्म तो... उन्नीस सौ अट्ठानवे में हुआ था। ये कैसे हो सकता था? तभी... कमरे की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं। पूरा कमरा... अंधेरे में डूब गया। फिर... एक आवाज़ आई... "हम... पचास साल से... तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे" ________________
तस्वीर के पीछे लिखा था... "सत्रह नवंबर उन्नीस सौ अठहत्तर" लेकिन... आरव का जन्म तो... उन्नीस सौ अट्ठानवे में हुआ था। ये कैसे हो सकता था? तभी... कमरे की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं। पूरा कमरा... अंधेरे में डूब गया। फिर... एक आवाज़ आई... "हम... पचास साल से... तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे" ________________
तस्वीर के पीछे लिखा था... "सत्रह नवंबर उन्नीस सौ अठहत्तर" लेकिन... आरव का जन्म तो... उन्नीस सौ अट्ठानवे में हुआ था। ये कैसे हो सकता था? तभी... कमरे की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं। पूरा कमरा... अंधेरे में डूब गया। फिर... एक आवाज़ आई... "हम... पचास साल से... तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे..." _____________
तस्वीर के पीछे लिखा था... "सत्रह नवंबर उन्नीस सौ अठहत्तर" लेकिन... आरव का जन्म तो... उन्नीस सौ अट्ठानवे में हुआ था। ये कैसे हो सकता था? तभी... कमरे की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं। पूरा कमरा... अंधेरे में डूब गया। फिर... एक आवाज़ आई... "हम... पचास साल से... तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे..." _____________
तस्वीर के पीछे लिखा था... "सत्रह नवंबर उन्नीस सौ अठहत्तर" लेकिन... आरव का जन्म तो... उन्नीस सौ अट्ठानवे में हुआ था। ये कैसे हो सकता था? तभी... कमरे की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं। पूरा कमरा... अंधेरे में डूब गया। फिर... एक आवाज़ आई... "हम... 50 साल से... तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे..." _______________
तस्वीर के पीछे लिखा था... "सत्रह नवंबर उन्नीस सौ अठहत्तर" लेकिन... आरव का जन्म तो... 1998 में हुआ था। ये कैसे हो सकता था? तभी... कमरे की सारी लाइटें एक साथ बुझ गईं। पूरा कमरा... अंधेरे में डूब गया। फिर... एक आवाज़ आई... "हम... 50 साल से... तुम्हारा इंतज़ार कर रहे थे..." _____________________________
घड़ी में... दो बजकर बयालीस मिनट हो चुके थे। आरव ने खुद को समझाया... "ये सब थकान है..." तभी... अलमारी का दरवाज़ा... धीरे-धीरे खुलने लगा। अंदर... पुरानी तस्वीरों का एक डिब्बा रखा था। हर तस्वीर में... अलग-अलग लोग थे। लेकिन... उन सबकी आखिरी फोटो... इसी कमरे में ली गई थी। सबकी आँखों के पीछे... एक काली पर
घड़ी में... 2 बजकर 42 मिनट हो चुके थे। आरव ने खुद को समझाया... "ये सब थकान है..." तभी... अलमारी का दरवाज़ा... धीरे-धीरे खुलने लगा। अंदर... पुरानी तस्वीरों का एक डिब्बा रखा था। हर तस्वीर में... अलग-अलग लोग थे। लेकिन... उन सबकी आखिरी फोटो... इसी कमरे में ली गई थी। सबकी आँखों के पीछे... एक काली परछाई ख
आरव झटके से पलटा। कोई नहीं। लेकिन कमरे का दरवाज़ा... धीरे-धीरे... अपने आप बंद हो गया। उसने तुरंत हैंडल घुमाया। दरवाज़ा नहीं खुला। उसने रिसेप्शन पर फोन लगाया। कोई जवाब नहीं तभी कमरे के कोने से... एक बच्ची की आवाज़ आई... "भैया.. क्या आप मुझे देख सकते हो?" ________________________________________ आरव
आरव झटके से पलटा। कोई नहीं। लेकिन कमरे का दरवाज़ा... धीरे-धीरे... अपने आप बंद हो गया। उसने तुरंत हैंडल घुमाया। दरवाज़ा नहीं खुला। उसने रिसेप्शन पर फोन लगाया। कोई जवाब नहीं तभी... कमरे के कोने से... एक बच्ची की आवाज़ आई... "bhaiya... क्या आप मुझे देख सकते हो?" ________________________________________
आरव झटके से पलटा। wahan कोई नहीं tha लेकिन कमरे का दरवाज़ा... धीरे-धीरे अपने आप बंद हो गया। उसने तुरंत हैंडल घुमाया दरवाज़ा नहीं खुला। उसने रिसेप्शन पर फोन लगाया। कोई जवाब नहीं। तभी कमरे के कोने से... एक बच्ची की आवाज़ आई... "भैया... क्या आप मुझे देख सकते हो?" _______________________________________