कबीर ने ड्राइवर से पूछा... "ये कौन-सी जगह है?" ड्राइवर मुस्कुराया... "जहाँ लोग आते तो हैं... लेकिन... वापस नहीं जाते।" कबीर घबरा गया। उसने तुरंत दरवाज़ा खोलने की कोशिश की। दरवाज़ा... अंदर से लॉक था। उसी समय... रियर-व्यू मिरर में... उसे पीछे एक और यात्री दिखाई दिया। __________________________________
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कबीर ने सोचा... शायद कोई मज़ाक कर रहा है। वह टैक्सी में बैठ गया। दरवाज़ा बंद हुआ। टैक्सी चल पड़ी। दो मिनट बाद... कबीर ने मोबाइल निकाला। नेटवर्क... गायब था। GPS... बंद था। उसने बाहर देखा। सड़कें... मुंबई की नहीं थीं। ________________________________________ सामने लगे बोर्ड पर लिखा था... "स्वागत है...
अगर आधी रात को... कोई टैक्सी खुद आपके सामने आकर रुक जाए... और ड्राइवर आपका नाम लेकर कहे... "बैठो... मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रहा था..." तो क्या आप बैठेंगे? मुंबई... रात के एक बजकर सत्रह मिनट... पत्रकार कबीर मेहरा एक न्यूज़ शूट खत्म करके घर लौट रहा था। बारिश लगातार हो रही थी। सड़क पूरी तरह सुनसान थी।
अचानक... मेट्रो रुक गई। दरवाज़े खुले। इस बार... बाहर... दिल्ली मेट्रो स्टेशन था। सुबह हो चुकी थी। रोहन भागकर बाहर आया। स्टेशन बिल्कुल सामान्य था। उसने राहत की साँस ली। तभी... उसकी जेब में रखा... वही पुराना टिकट... अपने आप जलने लगा। राख बनने से पहले... उस पर सिर्फ एक लाइन बची... "अगला स्टेशन... होटल
रोहन ने... फिर भी... पीछे देखा। ड्राइवर केबिन का दरवाज़ा खुला हुआ था। अंदर... कोई ड्राइवर नहीं था। सिर्फ... एक पुरानी डायरी रखी थी। उसके पहले पन्ने पर लिखा था... प्रोजेक्ट काल... ________________________________________ नीचे... एक लाइन लिखी थी... **"कमरा तीन सौ सात से भागने वाले... यहीं आते हैं..."*
रोहन ने... फिर भी... पीछे देखा। ड्राइवर केबिन का दरवाज़ा खुला हुआ था। अंदर... कोई ड्राइवर नहीं था। सिर्फ... एक पुरानी डायरी रखी थी। उसके पहले पन्ने पर लिखा था... प्रोजेक्ट काल ________________________________________ नीचे... एक लाइन लिखी थी... **"कमरा तीन सौ सात से भागने वाले... यहीं आते हैं..."** _
रोहन भागकर दूसरे डिब्बे में गया। लेकिन... हर डिब्बे में... वही बूढ़ी औरत बैठी थी। हर सीट पर... उसी का चेहरा। सैकड़ों बार। सभी... एक साथ मुस्कुरा रहे थे। ________________________________________ सभी ने... एक साथ कहा... "पीछे मत देखना..." ________________________________________
मेट्रो फिर चल पड़ी। अब... डिब्बे में बैठे यात्रियों की संख्या कम होने लगी। हर स्टेशन पर... एक यात्री उतर जाता। लेकिन... कोई नया नहीं चढ़ता। कुछ ही देर बाद... पूरे डिब्बे में... सिर्फ दो लोग बचे। रोहन... और... वह बूढ़ी औरत। ________________________________________ औरत बोली... "अब... अगला नंबर... तुम्
मेट्रो फिर चल पड़ी। अब... डिब्बे में बैठे यात्रियों की संख्या कम होने लगी। हर स्टेशन पर... एक यात्री उतर जाता। लेकिन... कोई नया नहीं चढ़ता। कुछ ही देर बाद... पूरे डिब्बे में... सिर्फ दो लोग बचे। रोहन... और... वह बूढ़ी औरत। ________________________________________ END औरत बोली... "अब... अगला नंबर...
रोहन अगले स्टेशन पर उतरना चाहता था। लेकिन... जैसे ही दरवाज़ा खुला... उसे बाहर... एक पूरा शहर दिखाई दिया। सड़कें थीं। इमारतें थीं। गाड़ियाँ थीं। लेकिन... कोई इंसान नहीं था। सिर्फ... हज़ारों परछाइयाँ... जो उसकी तरफ देख रही थीं। ________________________________________ उनमें से... एक परछाई... मुस्कुराई
टिकट पर... आज की तारीख नहीं थी। उस पर लिखा था... सत्रह नवंबर उन्नीस सौ अठहत्तर... नीचे... एक काला गोल निशान बना था... जिसके बीच में... सीधी काली रेखा थी। उसी समय... रोहन को याद आया... यही निशान... उसने कहीं देखा था। ________________________________________ मेट्रो की दीवार पर... वही निशान... धीरे-धीर
टिकट पर... आज की तारीख नहीं थी। उस पर लिखा था... सत्रह नवंबर उन्नीस सौ अठहत्तर नीचे... एक काला गोल निशान बना था... जिसके बीच में... सीधी काली रेखा थी। उसी समय... रोहन को याद आया... यही निशान... उसने कहीं देखा था। ________________________________________ मेट्रो की दीवार पर... वही निशान... धीरे-धीरे..
जैसे ही बूढ़ी औरत अंदर आई... डिब्बे का तापमान... एकदम गिर गया। उसने रोहन के सामने बैठकर... धीरे से पूछा... "तुम्हें किसने बुलाया?" रोहन हँसते हुए बोला... "क्या मतलब?" औरत मुस्कुराई... "इस मेट्रो में... कोई अपनी मर्ज़ी से नहीं आता।" ________________________________________ उसने रोहन के हाथ में... एक
रोहन घबरा गया। उसने अगला स्टेशन देखने के लिए स्क्रीन की तरफ देखा। लेकिन... स्क्रीन पर... किसी स्टेशन का नाम नहीं था। सिर्फ... एक लाइन लिखी थी... नेक्स्ट स्टॉप नो रिटर्न वह हँस पड़ा। उसे लगा... किसी ने सिस्टम हैक कर दिया होगा। लेकिन... तभी... मेट्रो अचानक रुक गई। दरवाज़े खुले। बाहर... कुछ भी नहीं थ
रोहन घबरा गया। उसने अगला स्टेशन देखने के लिए स्क्रीन की तरफ देखा। लेकिन... स्क्रीन पर... किसी स्टेशन का नाम नहीं था। सिर्फ... एक लाइन लिखी थी... नेक्स्ट स्टॉप नो रिटर्न वह हँस पड़ा। उसे लगा... किसी ने सिस्टम हैक कर दिया होगा। लेकिन... तभी... मेट्रो अचानक रुक गई। दरवाज़े खुले। बाहर... कुछ भी नहीं था।
रोहन घबरा गया। उसने अगला स्टेशन देखने के लिए स्क्रीन की तरफ देखा। लेकिन... स्क्रीन पर... किसी स्टेशन का नाम नहीं था। सिर्फ... एक लाइन लिखी थी... NEXT STOP NO RETURN वह हँस पड़ा। उसे लगा... किसी ने सिस्टम हैक कर दिया होगा। लेकिन... तभी... मेट्रो अचानक रुक गई। दरवाज़े खुले। बाहर... कुछ भी नहीं था। न प
रोहन अंदर बैठ गया। दरवाज़े बंद हो गए। मेट्रो चल पड़ी। लेकिन... कुछ सेकंड बाद... उसे एहसास हुआ... पूरे डिब्बे में... कोई आवाज़ नहीं थी। न इंजन की... न पहियों की... न यात्रियों की। सब लोग... अपना सिर झुकाए बैठे थे। कोई... एक-दूसरे को नहीं देख रहा था। ________________________________________ अचानक... ए
مرحبًا — Hallo صباح الخير — Guten Morgen يوم سعيد / نهارك سعيد — Guten Tag مساء الخير — Guten Abend تصبح على خير — Gute Nacht مع السلامة — Tschüss إلى اللقاء — Auf Wiedersehen أراك قريبًا — Bis bald أهلاً وسهلاً — Willkommen شكرًا — Danke شكرًا جزيلًا — Vielen Dank من فضلك / ال
दिल्ली... सर्दियों की एक रात... घड़ी में बारह बजकर अठारह मिनट हो चुके थे। रोहन... एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर... आज पहली बार ऑफिस में इतनी देर तक रुका था। वह भागते हुए मेट्रो स्टेशन पहुँचा। स्टेशन लगभग खाली था। सिक्योरिटी गार्ड ने उसे देखा... और जोर से चिल्लाया... "रुको! आख़िरी मेट्रो में मत जाना!" लेकिन.
أيّ (للمذكر) — Welcher اسم — Name عمر — Alter لغة — Sprache بلد — Land مدينة — Stadt قرية — Dorf عمل — Arbeit مدرسة — Schule جامعة — Universität دورة — Kurs معلم — Lehrer تلميذ — Schüler طالب جامعي — Student كتاب — Buch كلمة — Wort جملة — Satz سؤال — Frage جواب — Antwort مثال — Be
مرحبًا — Hallo صباح الخير — Guten Morgen يوم سعيد / نهارك سعيد — Guten Tag مساء الخير — Guten Abend تصبح على خير — Gute Nacht مع السلامة — Tschüss إلى اللقاء — Auf Wiedersehen أراك قريبًا — Bis bald أهلاً وسهلاً — Willkommen شكرًا — Danke شكرًا جزيلًا — Vielen Dank من فضلك / العفو — Bitte
الاثنين: Montag الثلاثاء: Dienstag الأربعاء: Mittwoch الخميس : Donnerstag الجمعة: Freitag السبت: Samstag الأحد: Sonntag والآن لنتعلم بعض الكلمات الأساسية المتعلقة بالوقت: اليوم: Heute غدًا: Morgen أمس: Gestern لنستخدمها في جمل بسيطة: اليوم هو يوم الاثنين. Heute ist Monta
تعلم الألمانية من الصفر – الدرس الخامس: أيام الأسبوع مرحبًا بكم في الدرس الخامس من سلسلة تعلم اللغة الألمانية. في هذا الدرس سنتعرف على أيام الأسبوع باللغة الألمانية، بالإضافة إلى ثلاث كلمات مهمة نستخدمها كثيرًا في الحياة اليومية: اليوم، غدًا، وأمس لنبدأ بأيام الأسبوع
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